96.33% से NEET तक… नीतू ने लिखी संघर्ष, सहयोग और सफलता की कहानी
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रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल

झाड़ोल। कहते हैं प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती, जरूरत होती है तो सिर्फ उसे पहचानने वाले हाथों और उसे सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक की। झाड़ोल उपखंड के सुल्तान जी का खेरवाड़ा गांव की प्रतिभावान छात्रा नीतू कुमावत ने अपनी मेहनत, लगन और मजबूत इरादों के दम पर इसी बात को सच साबित कर दिखाया है। सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश से निकलकर नीतू ने वर्ष 2026 की नीट परीक्षा उत्तीर्ण कर डॉक्टर बनने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। अब वह कर्नाटक के छतरपुर स्थित मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई करेगी।


नीतू की सफलता की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि यह केवल परीक्षा पास करने की कहानी नहीं, बल्कि प्रतिभा की पहचान, सही समय पर मिले सहयोग और एक शिक्षक की संवेदनशील पहल की कहानी है। नीतू के सपने को उड़ान देने में शिक्षक एवं समाजसेवी नरेश लोहार की भूमिका महत्वपूर्ण रही। नरेश लोहार ने नीतू की प्रतिभा को समय रहते पहचाना और उसके डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए सहयोग जुटाने का प्रयास शुरू किया।


नीतू ने अपनी प्रतिभा का परिचय वर्ष 2023 में ही दे दिया था, जब उसने कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 96.33 प्रतिशत अंक हासिल किए। ग्रामीण परिवेश से आने वाली इस छात्रा की मेहनत और प्रतिभा ने शिक्षक नरेश लोहार का ध्यान आकर्षित किया। उन्हें महसूस हुआ कि यदि नीतू को बेहतर शैक्षणिक संसाधन और उचित मार्गदर्शन मिल जाए तो वह चिकित्सा क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकती है।


यहीं से नीतू के सपनों को नई दिशा मिलने की शुरुआत हुई। नरेश लोहार के प्रयासों से अंत्योदय फाउंडेशन, मुंबई से जुड़े दानदाता एवं जोधपुर मूल के महेश सिंगी, जो वर्तमान में मुंबई में रहते हैं, आगे आए और नीतू की नीट तैयारी के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान किया। इस सहयोग से नीतू का उदयपुर के प्रतिष्ठित एसेंट कोचिंग संस्थान में प्रवेश करवाया गया। ग्रामीण परिवेश की छात्रा के लिए यह अवसर उसके भविष्य की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।


इसके बाद नीतू ने उदयपुर में रहकर लगातार मेहनत की। पढ़ाई का दबाव, प्रतियोगी परीक्षा की चुनौती और अपने लक्ष्य तक पहुंचने का लंबा सफर—इन सबके बीच उसने हार नहीं मानी। करीब चार वर्षों तक निरंतर अध्ययन, शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग के साथ वह अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रही। आखिरकार उसकी मेहनत रंग लाई और नीट 2026 में सफलता हासिल कर उसने डॉक्टर बनने के सपने की पहली बड़ी सीढ़ी पार कर ली।


नीट में सफलता के बाद नीतू को छतरपुर, कर्नाटक के मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में प्रवेश मिला है। अब उसकी मंजिल डॉक्टर बनना है। जिस छात्रा ने कभी ग्रामीण परिवेश में सीमित संसाधनों के बीच डॉक्टर बनने का सपना देखा था, वही सपना अब मेडिकल कॉलेज की दहलीज तक पहुंच चुका है।


एक छात्रा की सफलता नहीं, पूरी सोच की जीत


नीतू की उपलब्धि को केवल उसके व्यक्तिगत परिणाम के रूप में देखना इस कहानी को छोटा करना होगा। यह उस सोच की सफलता है जिसमें किसी ग्रामीण प्रतिभा को परिस्थितियों के भरोसे छोड़ने के बजाय उसे आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया। नीतू ने अपनी मेहनत से साबित किया कि संसाधनों की कमी प्रतिभा की राह में स्थायी दीवार नहीं होती, बशर्ते परिवार, शिक्षक और समाज समय पर उसका हाथ थाम लें।


इस सफलता में नीतू के परिवार का त्याग और सहयोग अपनी जगह महत्वपूर्ण रहा, वहीं शिक्षक नरेश लोहार की पहल ने उसे आगे बढ़ने का अवसर दिलाने में अहम भूमिका निभाई। अंत्योदय फाउंडेशन से जुड़े सहयोग और दानदाता महेश सिंगी की आर्थिक मदद ने नीतू को बेहतर तैयारी का अवसर दिया। यही सहयोग आगे चलकर नीट की सफलता में बदल गया।


नरेश लोहार की पहल बनी नीतू के सपनों की मजबूत सीढ़ी


शिक्षक नरेश लोहार के लिए यह उपलब्धि महज किसी विद्यार्थी के अच्छे परिणाम की खबर नहीं है। एक शिक्षक के सामने सबसे बड़ी खुशी तब होती है, जब उसके मार्गदर्शन और प्रयास से किसी विद्यार्थी का जीवन नई दिशा पकड़ता है। नीतू के मामले में भी यही हुआ। प्रतिभा को पहचानना, उसके सपने को गंभीरता से लेना और उसके लिए सहयोग का रास्ता तैयार करना—इन प्रयासों ने नीतू को उस मुकाम तक पहुंचाने में मदद की, जहां अब वह डॉक्टर बनने की तैयारी करेगी।


नीतू की सफलता यह संदेश भी देती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, कमी कई बार अवसरों की होती है। यदि ऐसे विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें शिक्षा, मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए तो गांवों से भी डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य पेशेवर निकल सकते हैं।


अब सपना सिर्फ अपना नहीं, समाज के लिए भी


नीट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद नीतू के सामने अब एमबीबीएस की नई चुनौती है। लेकिन जिस दृढ़ता के साथ उसने अब तक का सफर तय किया है, उससे उसके सामने डॉक्टर बनने का सपना अब पहले से कहीं अधिक वास्तविक नजर आ रहा है। नीतू का लक्ष्य डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है।


सुल्तान जी का खेरवाड़ा की इस बेटी की कहानी उन ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की किरण है, जो संसाधनों की कमी के कारण अपने बड़े सपनों को लेकर असमंजस में रहते हैं। नीतू ने दिखा दिया कि सपना बड़ा हो, मेहनत लगातार हो और किसी का साथ सही समय पर मिल जाए तो गांव की बेटी भी मेडिकल कॉलेज तक पहुंच सकती है।


नीतू कुमावत की यह सफलता झाड़ोल क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। 96.33 प्रतिशत से शुरू हुआ उसका सफर अब मेडिकल कॉलेज तक पहुंच चुका है। इस सफर में नीतू की मेहनत सबसे बड़ी ताकत रही, लेकिन उसके सपने को अवसर देने वाले परिवार, शिक्षक नरेश लोहार, अंत्योदय फाउंडेशन और दानदाता महेश सिंगी का सहयोग भी इस कहानी का महत्वपूर्ण अध्याय बन गया है।


अब इंतजार उस दिन का है जब सुल्तान जी का खेरवाड़ा की यह प्रतिभावान बेटी डॉक्टर की सफेद कोट पहनकर अपने गांव लौटेगी—और उसकी सफलता आने वाली पीढ़ियों को बताएगी कि बड़े सपनों की शुरुआत छोटे गांवों से भी हो सकती है।