रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल
जयपुर/झाड़ोल। राजस्थान में लंबे समय से चुनावी तारीखों का इंतजार कर रहे ग्रामीण मतदाताओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव 2026 के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। आयोग की ओर से जारी प्रेस-नोट के अनुसार चुनाव प्रक्रिया 8 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी और ग्राम पंचायतों के सरपंच-पंच सहित पंचायत समिति एवं जिला परिषद के चुनाव चार चरणों में संपन्न होंगे। चुनाव कार्यक्रम सामने आते ही प्रदेश के गांवों में राजनीतिक हलचल तेज होने के साथ संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता भी निर्णायक दौर में पहुंच गई है।
4.03 करोड़ मतदाता तय करेंगे गांव की सरकार
इस बार पंचायतीराज चुनाव में कुल 4 करोड़ 3 लाख 7 हजार 308 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें 2,08,87,351 पुरुष, 1,94,19,789 महिलाएं और 168 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। आयोग ने प्रदेशभर में मतदान के लिए 45,384 मतदान केंद्र निर्धारित किए हैं।
पिछले वर्ष 2020-21 के चुनाव में मतदाताओं की संख्या 3,79,46,235 थी। इस लिहाज से इस बार मतदाताओं की संख्या में 6.22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यानी इस चुनाव में करीब 23.6 लाख अधिक मतदाता गांवों की सरकार चुनने जा रहे हैं।
मतदाता वर्गीकरण पर नजर डालें तो 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के 76.24 लाख से अधिक मतदाता हैं, जबकि 26 से 35 वर्ष आयु वर्ग में करीब 1.09 करोड़ मतदाता हैं। इससे साफ है कि युवा मतदाता भी इस चुनाव में बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं।
41 जिला परिषद और 457 पंचायत समितियों के चुनाव
परिसीमन के बाद राज्य में जिला परिषदों की संख्या 33 से बढ़कर 41 हो गई है। जिला परिषद के निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या भी 1,014 से बढ़कर 1,403 हो गई है। इसी तरह पंचायत समितियों की संख्या 352 से बढ़कर 457, उनके निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या 6,995 से बढ़कर 8,245 तथा ग्राम पंचायतों की संख्या 11,320 से बढ़कर 14,403 हो गई है।
यानी इस बार चुनाव का दायरा पहले की तुलना में काफी बड़ा है। आयोग के आंकड़ों के अनुसार कुल जनप्रतिनिधियों की संख्या 1,28,942 से बढ़कर 1,55,138 हो गई है।
ग्राम पंचायतों के वार्डों की संख्या भी 1,09,228 से बढ़कर 1,30,589 हो गई है। इसका सीधा अर्थ है कि इस बार ग्रामीण राजनीति में पहले से कहीं अधिक पदों पर चुनावी मुकाबला देखने को मिलेगा।
8 अक्टूबर से नामांकन की शुरुआत, 13 अक्टूबर तक जिला परिषद सदस्यों के नामांकन
जिला परिषद सदस्यों के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा चुनाव की लोकसूचना 8 अक्टूबर को जारी की जाएगी। नाम निर्देशन पत्र जमा करने की अंतिम तारीख 13 अक्टूबर दोपहर 3 बजे तक रहेगी। नामांकन पत्रों की जांच 14 अक्टूबर को होगी, जबकि नाम वापसी की अंतिम तारीख 15 अक्टूबर दोपहर 3 बजे तक निर्धारित की गई है। इसके बाद उसी दिन चुनाव चिह्न आवंटित कर प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी की जाएगी।
पंचायत समिति सदस्यों के लिए भी चरणवार इसी तरह प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। चार चरणों के लिए नामांकन की अंतिम तिथियां क्रमशः 13 अक्टूबर, 16 अक्टूबर, 23 अक्टूबर और 4 नवंबर निर्धारित की गई हैं।
सरपंच बनने की दौड़ भी अब खुली, चार चरणों में होगा फैसला
ग्राम पंचायतों में पंच एवं सरपंच पद के लिए चुनाव प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 8 अक्टूबर से शुरू होगा। चारों चरणों के लिए नामांकन की अंतिम तिथियां क्रमशः 24 अक्टूबर, 30 अक्टूबर, 5 नवंबर और 15 नवंबर रहेंगी।
सरपंच एवं पंच पद के लिए मतदान क्रमशः 25 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 6 नवंबर और 16 नवंबर को होगा। मतदान का समय सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित किया गया है। ग्राम पंचायत मुख्यालय पर सरपंच-पंच के मतों की गणना मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद की जाएगी।
इसका मतलब साफ है कि पहले चरण वाले इलाकों में 24 अक्टूबर तक प्रत्याशियों की तस्वीर साफ हो जाएगी और 25 अक्टूबर को सीधे जनता के बीच वोट की परीक्षा होगी।
झाड़ोल, ओगणा और फलासिया के लिए सबसे अहम तारीख—25 अक्टूबर
उदयपुर जिले के लिहाज से चुनाव कार्यक्रम और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। आयोग की चरणवार सूची में झाड़ोल पंचायत समिति के साथ ओगणा और फलासिया क्षेत्र को प्रथम चरण में रखा गया है।
झाड़ोल पंचायत समिति में 34 ग्राम पंचायतें, ओगणा में 24 ग्राम पंचायतें और फलासिया में 35 ग्राम पंचायतें हैं। यानी इन तीनों क्षेत्रों की कुल 93 ग्राम पंचायतों में प्रथम चरण में सरपंच-पंच के चुनाव होंगे।
इन क्षेत्रों में 8 अक्टूबर को चुनाव प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत, 24 अक्टूबर को नामांकन की अंतिम तारीख और 25 अक्टूबर को मतदान होगा। मतदान समाप्त होते ही ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर सरपंच-पंच के मतों की गणना की जाएगी।
ऐसे में झाड़ोल-ओगणा-फलासिया क्षेत्र में आने वाले दिनों में चुनावी गतिविधियां तेजी से बढ़ने के आसार हैं। संभावित प्रत्याशियों के लिए अब केवल जनसंपर्क ही नहीं, बल्कि नामांकन, समर्थकों की रणनीति और चुनावी प्रबंधन भी निर्णायक चरण में पहुंच जाएगा।
पंचायत समिति और जिला परिषद का हिसाब अलग, परिणाम 20 नवंबर को
पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव में ग्राम पंचायतों की तुलना में प्रक्रिया अलग रहेगी। चार चरणों में मतदान की तारीखें क्रमशः 23 अक्टूबर, 29 अक्टूबर, 4 नवंबर और 14 नवंबर तय की गई हैं।
इन चुनावों की मतगणना 20 नवंबर 2026 को सुबह 8 बजे से सभी चरणों के लिए जिला मुख्यालय पर होगी।
इसके बाद 25 नवंबर को जिला प्रमुख, 26 नवंबर को उप जिला प्रमुख, 27 नवंबर को प्रधान और 28 नवंबर को उप प्रधान के चुनाव कराए जाएंगे।
इस तरह पंचायत चुनाव की प्रक्रिया केवल सरपंच चुनाव तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नवंबर के अंतिम सप्ताह तक जिला स्तर से लेकर पंचायत समिति स्तर तक नेतृत्व की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
EVM से पंचायत समिति-जिला परिषद, मतपेटी से पंच-सरपंच
इस बार चुनाव की तकनीकी व्यवस्था भी खास है। आयोग के अनुसार ग्राम पंचायतों के सरपंच और वार्ड पंच का चुनाव मतपेटी के माध्यम से कराया जाएगा, जबकि जिला परिषद एवं पंचायत समिति के सभी वार्डों का चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM से होगा।
आयोग ने बताया है कि अलग-अलग जिलों में अलग मॉडल की EVM का इस्तेमाल किया जाएगा और मशीनों का आवंटन रैंडमाइजेशन प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा। चुनाव अधिकारियों के लिए ई-प्रशिक्षण सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध कराया गया है।
मतदाता पहचान के लिए 11 विकल्प, EPIC नहीं तो भी वोट का रास्ता
मतदान के दौरान मतदाता पहचान पत्र यानी EPIC के अलावा आयोग ने 11 वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेजों को मान्य किया है। इनमें आधार कार्ड, मनरेगा कार्ड, बैंक/डाकघर की फोटोयुक्त पासबुक, आयुष्मान भारत कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, भारतीय पासपोर्ट सहित अन्य निर्धारित दस्तावेज शामिल हैं।
हालांकि आयोग ने स्पष्ट किया है कि वैकल्पिक दस्तावेज वही मान्य होंगे जो चुनाव की घोषणा से पहले जारी किए गए हों।
17 हजार से ज्यादा कर्मचारी, 2.72 लाख पुलिसकर्मियों की तैनाती
चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए बड़े स्तर पर प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है। आयोग के अनुसार मतदान, मतगणना और अन्य चुनावी कार्यों के लिए लगभग 3,17,688 कार्मिकों को लगाया जाएगा।
वहीं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 2,72,304 पुलिस बल चुनाव प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में तैनात किया जाएगा।
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य में होने वाला यह चुनाव प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से कितना बड़ा अभियान होगा।
चुनाव खर्च की सीमा भी तय
पंचायतीराज चुनाव में उम्मीदवारों के खर्च पर भी सीमा निर्धारित की गई है। जारी कार्यक्रम के अनुसार जिला परिषद सदस्य के लिए अधिकतम 3 लाख रुपये, पंचायत समिति सदस्य के लिए 1.50 लाख रुपये और सरपंच के लिए 1 लाख रुपये तक चुनाव खर्च की सीमा निर्धारित है।
उम्मीदवारों को चुनाव परिणाम घोषित होने के 15 दिन के भीतर अपने चुनाव खर्च का विवरण संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी अथवा अधिकृत अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
विजय जुलूस पर रोक, आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक यह प्रभावी रहेगी।
चुनाव के दौरान विकास कार्यों, नई घोषणाओं, सरकारी गतिविधियों और राजनीतिक प्रचार से जुड़े मामलों पर आचार संहिता के प्रावधान लागू होंगे। आयोग ने चुनाव परिणाम के बाद भी निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा विजय जुलूस निकाले जाने पर प्रतिबंध लगाया है।
नामांकन के दौरान भीड़ और वाहनों पर नियंत्रण
नामांकन प्रक्रिया को लेकर भी आयोग ने स्पष्ट व्यवस्था की है। रिटर्निंग अधिकारी या सहायक रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय में नामांकन के दौरान उम्मीदवार सहित अधिकतम पांच लोगों को प्रवेश की अनुमति होगी।
जिला परिषद सदस्य के लिए अधिकतम तीन वाहन, पंचायत समिति सदस्य के लिए अधिकतम दो वाहन और सरपंच पद के लिए अधिकतम एक वाहन लाने की अनुमति होगी।
चुनावी प्रचार में वाहनों के उपयोग और लाउडस्पीकर को लेकर भी प्रशासनिक अनुमति आवश्यक होगी।
वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं पर विशेष फोकस
आयोग ने दिव्यांग एवं वरिष्ठ नागरिक मतदाताओं के लिए विशेष सुविधाओं के निर्देश जारी किए हैं। दिव्यांग मतदाताओं की सहायता के लिए पंचायत समिति स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। वहीं वरिष्ठ नागरिक मतदाताओं के लिए भी मतदान केंद्रों पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अब गांव-गांव बदलेगा चुनावी माहौल
चुनाव कार्यक्रम जारी होने के साथ ही राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियों का स्वरूप अब तेजी से बदलने वाला है। जिन गांवों में अभी तक संभावित प्रत्याशियों की बैठकों, सामाजिक संपर्क और जनसंपर्क तक गतिविधियां सीमित थीं, वहां अब नामांकन और मतदान की निश्चित तारीख सामने आने के बाद चुनावी रणनीति अधिक स्पष्ट होगी।
खासकर झाड़ोल, ओगणा और फलासिया जैसे प्रथम चरण के क्षेत्रों में 25 अक्टूबर की मतदान तारीख सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव बन गई है। अब संभावित प्रत्याशियों के सामने समय सीमित है। 8 अक्टूबर से औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी और 24 अक्टूबर तक नामांकन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
यानी ग्रामीण राजनीति में अब चर्चा केवल “कौन चुनाव लड़ेगा?” तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अगले कुछ दिनों में “किस वार्ड से कौन मैदान में उतरेगा, किसके सामने कौन होगा और जनता किस मुद्दे पर फैसला करेगी” जैसे सवाल गांव-गांव की चौपालों में प्रमुख होने वाले हैं।
राजस्थान के 14,403 ग्राम पंचायतों, 457 पंचायत समितियों और 41 जिला परिषदों की चुनावी तस्वीर अब चरणबद्ध तरीके से सामने आएगी। 25 अक्टूबर से शुरू होने वाला मतदान 16 नवंबर तक चलेगा और 28 नवंबर को प्रधान-उपप्रधान चुनाव के साथ पंचायतीराज चुनाव प्रक्रिया का बड़ा चरण पूरा होगा।
