रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल
झाड़ोल। शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चे के व्यक्तित्व, संस्कार, अनुशासन और व्यवहार का निर्माण घर और विद्यालय के सामूहिक प्रयासों से होता है। इसी सोच को साकार करते हुए विद्या निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय, झाड़ोल में शुक्रवार को मातृशक्ति के सम्मान एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में माताओं की भूमिका को केंद्र में रखते हुए भव्य मातृ सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में क्षेत्र की 280 माताओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया।
विद्या निकेतन विद्यालय द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में माताओं की भागीदारी केवल एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही, बल्कि विद्यालय और अभिभावकों के बीच संवाद, सहभागिता और बेहतर समन्वय का प्रभावी मंच बनी। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यालय ने यह संदेश दिया कि बच्चों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए विद्यालय के साथ परिवार की सक्रिय सहभागिता भी उतनी ही आवश्यक है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि दीपिका पुरोहित, अध्यापिका, महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, झाड़ोल रहीं। मुख्य वक्ता महिपाल सिंह राठौड़, जिला साक्षरता शिक्षा अधिकारी, जिला उदयपुर-सलूंबर ने मातृशक्ति के महत्व और बच्चों के जीवन में माता की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि नरेश मादावत, समाजसेवी एवं सृष्टि संस्थान, उदयपुर तथा कमला देवी प्रजापत उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता नीतू कुँवर झाला, अभिभावक ने की।
मां ही संस्कारों की पहली पाठशाला
मुख्य वक्ता महिपाल सिंह राठौड़ ने कहा कि माता बच्चे की पहली पाठशाला और प्रथम गुरु होती है। बच्चे के जीवन में संस्कार, अनुशासन, व्यवहार, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की नींव रखने में माता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि मां का स्नेह, मार्गदर्शन और संस्कार बच्चे के व्यक्तित्व को मजबूत आधार प्रदान करते हैं। उन्होंने मातृशक्ति के सम्मान और उनके प्रति कृतज्ञता की भावना विकसित करने का संदेश दिया।
राठौड़ के संबोधन ने सम्मेलन में मौजूद माताओं को बच्चों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ उनके संस्कार और व्यवहार निर्माण में अपनी भूमिका को और अधिक प्रभावी ढंग से निभाने के लिए प्रेरित किया।
प्रतियोगिताओं ने बढ़ाया माताओं का उत्साह
सम्मेलन को केवल संवाद तक सीमित न रखते हुए विद्या निकेतन विद्यालय ने माताओं के लिए मेहंदी प्रतियोगिता एवं कुर्सी रेस का आयोजन भी किया। दोनों प्रतियोगिताओं में माताओं ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ भाग लिया। प्रतियोगिताओं के दौरान विद्यालय परिसर में उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला। प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली माताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
इस आयोजन ने यह भी दिखाया कि विद्या निकेतन विद्यालय विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों को भी विद्यालयी गतिविधियों से जोड़कर एक सकारात्मक और सहभागी वातावरण तैयार करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
विद्यालय और अभिभावकों के बीच मजबूत हुआ संवाद
मातृ सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष विद्यालय और अभिभावकों के बीच बेहतर संवाद एवं समन्वय रहा। बच्चों की पढ़ाई, नियमितता, संस्कार, अनुशासन, व्यवहार और व्यक्तित्व निर्माण जैसे विषयों पर माताओं की सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया गया।
विद्या निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय की ओर से आयोजित यह सम्मेलन इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा कि इसमें माताओं को केवल अभिभावक के रूप में नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार के रूप में जोड़ा गया। विद्यालय की यह पहल शिक्षा को परिवार और विद्यालय के संयुक्त प्रयास से आगे बढ़ाने की सोच को दर्शाती है।
कार्यक्रम प्रभारी सपना भटनागर एवं डिंपल जैन ने आयोजन की व्यवस्थाओं को सफलतापूर्वक संभाला। कार्यक्रम का मंच संचालन डिंपल जैन ने किया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य लाल सिंह शक्तावत, सचिव नंदलाल लक्षकार सहित विद्यालय का समस्त स्टाफ मौजूद रहा।
शिक्षा के साथ संस्कारों पर विद्या निकेतन का फोकस
मातृ सम्मेलन के माध्यम से विद्या निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय, झाड़ोल ने यह संदेश मजबूती से सामने रखा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास, व्यवहार-कौशल और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है।
विद्यालय और परिवार के बीच मजबूत तालमेल को बच्चों के सर्वांगीण विकास की आधारशिला बताते हुए सम्मेलन में माताओं की सक्रिय सहभागिता को विशेष महत्व दिया गया। 280 माताओं की उपस्थिति ने आयोजन की व्यापकता और अभिभावकों की विद्यालय के प्रति सहभागिता को भी सामने रखा।
मातृ सम्मेलन का समापन मातृशक्ति के सम्मान, विद्यालय एवं अभिभावकों के मजबूत समन्वय तथा विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के संकल्प के संदेश के साथ हुआ।
